तूफ़ान और ख़ामोशी
तूफ़ान और ख़ामोशी मिलते हैंकिसी जिद्दी बच्चे की मानिंद तूफ़ान सर पटकता है सारी चीजें इधर से उधर कर देता हैपेड़ की शाखाओं को हिलाता है चिड़िया डरके घोंसले में दुबक जाती है बरसनेवाले मेघ भी बादलों में दुबकेउड़ जाते हैं ..पर ख़ामोशी !एक माँ की तरह तूफ़ान का...
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रश्मि प्रभा...
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[12 Apr 2010 11:32 AM]



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