यूँ चले जाना किसी का..........
ध्यान में अपने निरन्तरमार्ग पर चलते हुए हीबीती कुछ सुनसान रस्तेकी अन्धेरी रात राहीकट गई कुछ राह तेरेसाथ करते बात राही...........
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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
राही
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[12 Apr 2010 10:44 AM]



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