तुक्तक
भटक,मटक,चटक,पटक ,मित्र गया राह भटक ,दौड़ता रहा सदा पर ,द्वार पर गया अटक //देखता रहा धरा ,गगन को गया गटक ,टाल ठोंकता रहा ,पर गया सदा पटक //तौलता है तालियाँ ,बात पर गयी खटक ,बना रहा स्वयं ध्वजा ,अंत मे बना लटक//...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[12 Apr 2010 10:16 AM]



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