shabdon ke akshat

shabdon ke akshat सपने ये सपने क्षणभंगुर है साबुन के बुलकुले पल में बनते पल में टूटते हैं रेत के महल। एक कोमल हवा के झोंके से गिर जाते, इस दिल में चाह जगाकर रात के गुमनाम अँधेरों में खो जाते, ये सपने क्षणभंगुर। चोरी से आँखों के रास्ते दिल में बसकर, अचानक एक पल की करवट से... [पूरी पोस्ट]
writer swati
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[12 Apr 2010 06:16 AM]

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