हितोपदेश 22 -हाथी और बाघ

नन्हा मन जन्गल मे इक हाथी रहता और वो खुद को राजा कहता बडी है कितनी मेरी देह हूँ राजा ,न कोई सन्देह इक दिन बाघों का झुण्ड आया देख के हाथी मन ललचाया सोचेँ हाथी जो मर जाए तो सब मिलकर मजे से खाएँ हाथी तो बस एक मरेगा पर हम सबका पेट भरेगा सबने मिल लगाई युक्ति हो कैसे... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा सचदेव
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[12 Apr 2010 06:08 AM]

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