चिट्ठाकार चर्चा में आज तशरीफ़ लाये हैं अली सैयद
अली सैयद से मेरी मुलाक़ात कोई बहुत पुरानी नहीं मगर लगता है हम कभी अपिरिचित रहे ही नहीं ...यह उन दिनों की बात है जब अंतर्जाल को लेकर मेरे रूमान ढह रहे थे और कितने ही रूप रंगों के मनुष्य दर मनुष्य अपने चित्र विचित्र चेहरों के साथ यहाँ आ जा रहे थे-तभी...
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Arvind Mishra
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[12 Apr 2010 03:33 AM]



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