गीत
मुश्किलों में हों जो अगर ,गीत गाइए/हार भी रहें हों तो फिर जीत जाइये //रूठिए तो मौसम की तरह ,हंसिये तो ख़ुशी सा ,मुहब्बत भरे पलों सा यहाँ बीत जाइये //यूं ही चलन रहा है प्यार का यहाँ .दुनिया में खुद को बाँट कर के रीत जाइये //होतें हैं क्यों...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[12 Apr 2010 02:57 AM]



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