जिस्म तो तूने नवाजा, खूबसूरत है उसे

gazal k bahane कोई मेरे जख्म सी दे, चैन आये तब कहींकोई मेरे गम खरीदे, चैन आये तब कहींजिस्म तो तूने नवाजा, खूबसूरत है उसे गर कहीं से रूह भी दे, चैन आये तब कहींसूखकर सहरा हुए हैं, नैन मेरे देख तो इनको सुख की भी नमी दे, चैन आये तब कहींछू रहे हैं दुश्मनों ... [पूरी पोस्ट]
writer श्याम सखा 'श्याम'
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[12 Apr 2010 00:26 AM]

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