जो मर गये या मार दिये गये
जो मर गये या मार दिये गयेवे तराजू के पलड़ों की तरह हैंजिन्हें तौला जाता रहा हैबारी-बारीकम और ज्यादा की तरह ।फर्क सिर्फ इतना है किकुछ भुला दिये गये थे मरने से पहलेऔर कुछ भुला दिये जायेंगे मरने के बादहमेशा के लिये ।रहेगी तो बस गिनतीउन सभी जमा सरकारी कागजों...
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अनिल कान्त :
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[12 Apr 2010 00:23 AM]



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