दिल कहीं पर जल रहा............
(by shiknet) दिल कहीं पर जल रहा और कहीं दीप है, तेरी मेरी कोई ना जानें ये कैसी प्रीत है। तू हमेशा प्रश्न मुझ पर दागता रहता सदा, मै हमेशा बहता हूँ जिस ओर चलती है हवा। बस मे मेरे अब नही, चलता नही कोई जोर है, मै गुलामी कर रहा चारों तरफ यह शोर है। वक्त के...
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परमजीत बाली
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[11 Apr 2010 20:40 PM]



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