प्रतिज्ञा हूँ मैं.....!
समय की वर्तुल अंगूठी से पृथकएक विस्तृत प्रतिज्ञा हूँ मैंओ, परित्यक्ता पृथ्वीभविष्य की कोख मेंमैं ही भरत हूँ सुबकियाँ लेतामेरी ही नसों मेंअतीत कीसम्पूर्ण विस्मृत असंपादितप्रतिज्ञाओं कालहू उफनता है।======================गुरुदेव कश्यप की रचना साभार....
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Dr. Chandra Kumar Jain
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[11 Apr 2010 23:29 PM]



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