‘सारे हिन्दू धार्मिक ग्रंथों को तोप से उड़ाकर उनका पुर्नलेखन होना चाहिए।
(युवा दख़ल की यह सौवीं पोस्ट सामाजिक न्याय के प्रखर प्रवक्ता डा अम्बेडकर के विचारों पर केन्द्रित करते हुए हमें अत्यंत संतोष का अनुभव हो रहा है। एक नौसिखुए की तरह शुरुआत करके हमारा संगठन और ब्लाग इस समयावधि में काफ़ी परिपक्व हुए हैं। इस अवसर पर हम...
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अशोक कुमार पाण्डेय
दलित विमर्श
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[11 Apr 2010 23:29 PM]



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