"मुझको पुकारे "
"मुझको पुकारे"झिलमिलाते दूर तक उजले सितारेऔर चाँद का आंचल थाम के देखोचल रहे नदीया के कीनारेपत्तो की खन खन कुछ कहना चाहेअलसाई पवन ले जब दरख्तों के सहारेऔर रात की बाँहों में मचले हैं देखोजगमगाते जुगनू ये सारेधुन्दले से साये अनजानी राहेकुछ गुनगुनाते ये...
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seema gupta
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[11 Apr 2010 22:22 PM]



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