बदलते मौसम में
उड़ी हवा में गन्ध, टूटने लगे लगे प्रतिबन्ध, मचलने लगे होंठ पर छन्द बदलते मौसम मेंजगी ह्रदय में प्रीत, सपन में आया मन का मीत, सुनाता हुआ नये कुछ गीत बदलते मौसम मेंचेहरे पर से हटा एक चादर को जागा कई दिनों से परछाईं के घर में जा था दिन सोयाहुई ओस की मद्दम...
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राकेश खंडेलवाल
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[11 Apr 2010 22:08 PM]



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