एक स्पॉसर्ड आलेख और बिकाऊ कविता
सर्दी की सुबह. घूप सेकने आराम से बरामदे में बैठा हुआ अखबार पलट रहा था गरमागरम चाय की चुस्कियों के साथ. भाई साहब, जरा अपने स्वास्थय का ध्यान रखिये. इतने मोटे होते जा रहे हैं.ऐसे में किसी दिन अनहोनी न घट जाये, आप मर भी सकते हैं. ये बात हमसे तिवारी जी कह...
[पूरी पोस्ट]
Udan Tashtari
93
9
0
9
25
[11 Apr 2010 21:00 PM]



Shuffle








