किसी का मुंह जो यह बात हमारे मुंह पर लावे

वेबलाग पर... .... ... के हमने यह नायाब अफ़साना जो रानी केतकी के नाम से चलता है, पूरा न किया ? वापस आकर देखता हूँ, तो डेढ़ महीने पूरा होना चाहते हैं.. और रानी का किस्सा कोने पड़ा मेरी राह तक रहा है । ज़माने की रुसवाईंयों ने मुझे खुद से रुबरू होने का इतना मौका भी न दिया कि... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
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[11 Apr 2010 16:32 PM]

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