रूपचंद शास्त्री जी…शब्दों के साथ ऐसा खिलवाड क्यूँ?…क्यूँ?…क्यूँ?
आदरणीय एवं माननीय रूपचंद शास्त्री जी ,नमस्कार सबसे पहले तो मैं तहेदिल से आपका शुक्रगुजार हूँ और जीवनपर्यंत रहूँगा कि आपने मुझ जैसे अदना से ब्लॉगर द्वारा… आपके ब्लॉग पर की गई कुछ निरर्थक (आपके हिसाब से) एवं तीखी टिप्पणियों(मेरे हिसाब से) का जवाब...
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राजीव तनेजा
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[11 Apr 2010 16:03 PM]



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