हार-जीत

तुम किसकी माँ हो मेरी मातृभूमि अशोक वाजपेयी की गद्य-कविता ' हार-जीत ' हिंसा की संस्कृति को बेहद शांत रूप में उघारती है. यह कविता ताकत , वर्चश्व और हिंसा के संस्थानों के सच को सामने लाती है. यह युद्ध मात्र का सच प्रकट करती है, स्वाभाविक रूप से इससे उसके सम्बद्ध पक्षों का सच भी प्रकट हो... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतोष पार्थेश्वर
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[11 Apr 2010 14:34 PM]

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