तुम्हारे लिए

Kuchh kahi kuchh unkahi तेरी आँखों से जो देखूं दुनिया मुझको रंग रंगीली लागे,रात चाँद बन उतरे अंखियन ,सूरज पलकन पे है जागे।तेरे अलकों में बंध कर हम , खोज रहे हैं खुद को कब से,तेरे स्नेह में पिरो गए हम , जैसे पिरोई हो सूई में धागे।**********************************************एक... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[11 Apr 2010 13:05 PM]

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