कविता :सुनो पर्यावरण की आवाजें

BAL SAJAG सुनो पर्यावरण की आवाजेंपर्यावरण और कल कल झरनों की आवाजमहसूस करो दोस्तो गंगा-यमुना की आवाजएक समय ऐसा भी थागंगा-यमुना समुन्दर जैसी थीगंगा-यमुना के पानी सेक्यों कर रहे हैं कोका-कोला तैयारक्या तुम्हें याद हैं एक बातपड़ गया था पानी का आकालउस समय येसा... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[11 Apr 2010 13:06 PM]

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