अंजलि, तुम्हारी डायरी से बयान मेल नहीं खाते हैं
निस्तब्ध कोठरी के कोनों से निकलकर अँधेरा बीच आँगन में पसरा हुआ था। दीवारों से सटी चुप्पी से अंदाजा लगाना भी मुश्किल था कि यहाँ पांच लोग बैठे है. उनमे एक ही साम्य था कि वे सभी एक लड़की को जानते थे या उसकी ज़िन्दगी को कहीं से छू गए थे. चमकदार सड़क से होता...
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Kishore Choudhary
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[11 Apr 2010 10:43 AM]



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