॥ दिनचर्या॥
(मुंडारी लोकगीत का काव्यांतर : दो)उठ बिहान मैं खेत गई थी धान रोपनेदुपहरिया तक पूरी हुई रोपाईरस्ते की चढ़ान और उतराईदौड़ी-दौड़ी घर आईघर से फिर पड़ोस के गांव जोजोहातू गईवहां किया बनिहारीलौटी घरउसको कूट-पीस करपकाया साग-भाततब तक शाम घिर आई,आने लगी अखाड़े परअब...
[पूरी पोस्ट]
अरविन्द चतुर्वेद
8
1
0
1
0
[11 Apr 2010 10:50 AM]



Shuffle








