अँधेरा है कितना और दीप कितने
अँधेरा है कितना और दीप कितने ,देखें इस दुनिया में कौन अपने |जिन्दगी की बाजी में अधूरे सपने ,पुरे करने वाले देखें मीत कितने ||राह न रुकेंगे झुकेंगे नहीं , मोड़ देंगे नदियाँ किन्तु मुड़ेंगे नहींखोल के तिजोरी आज देखेंगे ज़राकौन खोटा निकला है कौन है खरामोम के...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[11 Apr 2010 08:25 AM]



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