ये लकीरें.....!!

mahua कभी कभी कागज़ पर अनायास ही कुछ लकीरें खिंचती चली जाती हैं ...टेड़ी मेड़ी...अनगिनत महीन लकीरें.....इस जहन के नक्शे पर गढ़ती सी महसूस होती हैं......जाने क्या कहती......क्या छिपातीं .....जाने क्या उकेरतीं....भारहीन बनाती ...कभी बोझिल करतीं.....ये ऐसी...कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer tanu sharma.joshi
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[11 Apr 2010 06:56 AM]

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