नहीं चाँद को पाते माँ ...

naturica तेरा चूल्हा चाँद पका कर रखता मेरी थाली पर । रात तवे सी अब काली है नहीं चाँद को पाते माँ॥जन्मदिन...! यानी आज दुनिया में अपनी आमद को और दुनिया की इस आफत को ३० साल हो गए... ये ग़ज़ल आज माँ के लिए कही है...सिर रख के तुम्हारी गोद में आज अगर रो पाते माँ।तुम... [पूरी पोस्ट]
writer Deepak Tiruwa

ग़ज़ल

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[11 Apr 2010 06:04 AM]

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