प्रसन्न होऊँ ? अपने केश नोचूँ ? निर्लज्जता जारी रखूँ ?

एक आलसी का चिठ्ठा नौ महीनों की ज़िद्दी थेथरई के बाद जब मेरे पड़ोसी खुले सीवर मैनहोल पर चैम्बर बना कर ढक्कन लगाने के कार्य का श्रीगणेश हुआ तो मैं अति प्रसन्न हुआ। अब यह टेंसन खत्म होना था कि कोई भैंस सरीखा जानवर या बच्चा उसमें फिर से गिर जाएगा । लेकिन अब मुझे समझ में नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिजेश राव

लखनऊ

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[11 Apr 2010 04:58 AM]

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