“पेंसिल” (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

नन्हें सुमन रंग-बिरंगी पेंसिलें तो, हमको खूब लुभाती हैं। ये ही हमसे ए.बी.सी.डी., क.ख.ग. लिखवाती हैं।। रेखा-चित्र बनाना, इनके बिना असम्भव होता है।कला बनाना भी तो, केवल इनसे सम्भव होता है।। गल्ती हो जाये तो,लेकर रबड़ तुरन्त मिटा डालो।गुणा-भाग करना चाहो... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
views
13
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
6
[11 Apr 2010 03:58 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix