देर उतनी ही हुई है
जागी हुई रात के सोये हुए सपनोंदेर उतनी ही हुई हैजितनी दूरी है मेरे रूठे हुए अपनोंपलकों की मुंडेरों पर , थम गये होज़रा ठहरोकोई जागा है शब भर कोजादू की छड़ी हो तुमसपने सब हो जाते अपनेबन्द आँखों में करवट ले लोसच का रँग भर दोजागी हुई रात के सोये हुए पाहुनोंदेर...
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शारदा अरोरा
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[11 Apr 2010 02:29 AM]



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