हे श्याम!
हे श्याम! तेरी लकुटी कमरिया कहाँ गयो हेरायोदशा देख तू ग्वालबाल की जल में दूध मेरायोजल में दूध मेरायो समय ये कैसो आयोदूध दही ते छाडी दे, पनीर भी अशुद्ध बनायोकर ये बुरे काम गर्व से खुद को ग्वाल कहायोकहे रत्नेश हे श्याम ये वंश का बेडा पर लगायोबेडा पर लगायो...
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aarya
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[11 Apr 2010 01:13 AM]



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