हमेशा गाँव ही खुद को शहर में ढाल लेते हैं
मार्च माह की चौथी कविता एक ग़ज़ल है जिसे लिखा है रवीन्द्र शर्मा 'रवि' ने। रवि की ग़ज़लें हिन्द-युग्म के पाठक बहुत पसंद करते हैं। रवि एक बार हिन्द-युग्म के यूनिकवि भी रह चुके हैं।पुरस्कृत ग़ज़लगरीबी में भी बच्चे यूँ उड़ाने पाल लेते हैं ज़रा सी डाल झुक जाए...
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ravindra sharma ravi
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[11 Apr 2010 00:37 AM]



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