प्यार पर दो क्षणिकाएँ

अनुभूति कलश १- तुम दूर हो या पास , तुम्हारे प्यार का अहसास, मेरी साँसों में , संगीत भर देता है। २- ‘प्यार’ वह संजीवनी है, जो ऊसर ज़मीन को भी , उर्वरा बना देती है । डा.रमा द्विवेदी © All Rights Reserved... [पूरी पोस्ट]
writer ramadwivedi

क्षणिकाएंpyaar par do kshanikaayen

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[11 Apr 2010 00:47 AM]

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