तू भी मेरे ठोकरों पर हँस ले - A Thought
तू भी मेरे ठोकरों पर हँस ले ,हाथ छोर कर जो चला हु तेरा !परेशा ना हो मेरी गिरते सम्हलते कदमो पर ,कदम जब बढ़ा ही दिया अब चल परेगा ही ये सिलसिला ! !खवाहिश ही कब की मंजिलो को नापने की , बस चला हूँ .. और चलता रहे ये काफिला ! !रचना : सुजीत कुमार लक्की...
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sujit kumar lucky
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[10 Apr 2010 16:43 PM]



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