सारी रात
रात रात भरखदबदाते हैं विचारअदहन की तरहमेरा दिमाग बन जाता हैचूल्हे पर चढ़ी पतीली।कितने कितने विचारकैसे कैसे विचारढेर सारे विचारअच्छे बुरे सुखद दुखद।आसमान में उड़ती चिड़ियाबियाबान जंगलों की हरियालीपेड़ों के बीच भागते हिरनों का झुण्डफ़ूल पत्तियां झरनेतपते...
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हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
कविता
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[10 Apr 2010 14:45 PM]



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