कविता सारे आम गिरे तोते के शोर से

BAL SAJAG सारे आम गिरे तोते के शोर सेहरी डाल पर बैठा तोता ,हमने देखा वह पका आम खता.....मै नीचे बैठा वह ऊपर बैठा,उस आम के लिए मै एठा......मै बैठा सोचू कि यह आम मुझे ही मिले, इसका रस मेरे पेट में जाकर टहले.....बार बार तोता मेरी ओर देखता ,मुझे देखकर ठाँव ठाँव कर... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[10 Apr 2010 14:04 PM]

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