अरमानो के महल ...!!!
मेरे अरमानों !के महल कब के ढह गये , और वक्त की लहरों के संग बह गये ,क्या इतनी कच्ची थी मेरे प्यार की नीवं , जमाने के थपेड़े भी इससे सहे न गये । सच्चे प्यार से बनाते गर आशियाने अपने , जो आये थे बर्बाद करने वो यहीं रह गये । अब भी वक्त है संभालो अंजुमन अपनी...
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कमलेश वर्मा
महल अरमान
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[10 Apr 2010 11:46 AM]



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