साहित्य सर्जक
दांते वाडामें शहीद हुए जवानो के प्रति इस के बाद बचा ही क्या है और अधिक कुछ कहने को बंधुआ हैं जवान बेचारे गोली कहा कर मरने को क्यों कि तो लौह भवन में चैन की वंशी बजा रहे क्योंसंकल्प नही करते हो माओ वाद से लड़ने को सत्ता सोच रही है कितनी और बलि चाहिए उस को...
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vedvyathit
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[10 Apr 2010 10:06 AM]



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