मुझे कविताएं पढकर उबकाई आती है
इधर कुछ दिनों से मेल पर, बज्ज पर और कभी कभार चेट बॉक्स में भी कुछ लिंक आते हैं। कविताओं के लिंक। मन में जो आया सो भेज दिया। मुझे महसूस होता है कि ये तमाम कविताएं कोई एक ही शख्स लिख रहा है। वही भाषा, वही विन्यास, वही भाव। मन, पेड, पहाड, हृदय, अभिव्यक्ति,...
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सचिन ..........
कविता
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[10 Apr 2010 08:03 AM]



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