कविता की प्रासंगिकता

Kuchh kahi kuchh unkahi मैं किनका कवि हूँ - यह मुझे नहीं मालूम,पर यह सच है - और, मैं इससे अच्छी तरह वाकिफ हूँ,की मेरी कविता -शब्दों की नंगी दौड़ नहीं है।यह सिर्फ 'खुलेपन' को फैशन के तौर पर नहीं देखती, वरन जीती है उस अहसास को खुलकर।मेरी कविताओं की अपनी प्रासंगिकता है - अपनी... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[10 Apr 2010 07:26 AM]

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