जाने कहां गए वो दिन टाइप की चंद पुरानी यादें..

cinema- सिलेमा हाय रे ज़माना, कैसा बदला तेरा फ़साना. क्‍या थे क्‍या हो गए टाइप. हालांकि तब, पहले भी, यह नहीं ही रहा होगा कि आदर्शलोक के हम आदर्शलोग थे, फिर भी. मतलब इस एकता का प्रतीक वीडियो में ही ज़रा बाबू-बबुनी की आवाज़ की मिठाई और उसकी मासूमियत पर ग़ौर फ़रमाइए, यह... [पूरी पोस्ट]
writer Pramod Singh

डॉक्‍यूमेंट्री

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[10 Apr 2010 05:10 AM]

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