एक दिन : के.सच्चिदानन्दन की कविता
यह कविता कल सुबह लगभग ९.४० पर हमारे समय के समूचे भारतीय कविता के परिदृश्य के शिखर कवि और अपनी मौलिक कल्पनाशीलता के कारण सबसे अलग पहचाने जाने वाले के. सच्चिदानंदन ने 'फेस बुक' पर पेस्ट किया था. इस अनुवाद को भी आप 'तुरंता अनुवाद' या 'आशु-अनुवाद'...
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Uday Prakash
कविता
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[10 Apr 2010 04:54 AM]



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