आखिरी जिद
मेरे ह्रदय मेंपुण्य भी है पाप भीवरदान भी है शाप भीबिलकुल अवध के एक ढाँचे सा।सोचतासब नष्ट कर दूँ।फिर से बनाऊं 'एक मंदिर'शुद्ध, सुन्दर, पुण्य-संचितयही बालक मन की मेरीआखिरी जिद।एक राखूँएक अर्पित।हाथ मेरे है खिलौना 'श्री राम भूमि बाबरी मस्जिद'। (वैसे तो इस...
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PRATUL
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[05 Apr 2010 23:32 PM]



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