परवाना खुद शमा की लौ पे जल मरा कोई क्या करे
क्यों नही समझता तू दर्द को मेरे कभी क्यों समझता है कि मेरे सीने मे कोई दिल नहीं क्यों मरा कैसे मरा चाहे जिस पे इल्जाम दे पर सच बता हमदम मेरे क्या तू मेरा कातिल नहींखुद खुशी पाई ना आंचल तेरे खुशियां भर सकाबेमेल प्यार से किसी को कुछ हुआ हासिल नहींपरवाना...
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Krishan lal "krishan"
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[10 Apr 2010 03:46 AM]



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