महफूज़ भाई की कविता का अनुवाद --- इस कोशिश करी हैं
सबसे पहले तो सबके दिलो के सरदार आर्य ललित शर्मा जी से बालहठ ---- आप लौट के आईये, कोई बहाना नहीं चलेगा!!!! ये हमारा बालहठ हैं, हमें वापसी चाहिए. नुक्कड़ पर पोस्ट आई हैं कि महफूज़ भाई की कविता का अनुवाद करे. मैंने महफूज़ भाई से एक बार कहा था कि उनकी...
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यशवन्त मेहता "फ़कीरा"
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[10 Apr 2010 03:16 AM]



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