हम इतने छुई-मुई से क्यों हैं? किसी ने कुछ कहा और हम भाग खड़े होते हैं?
जब लोगों को देखती हूँ कि गुलाब की पत्तियों से भी घाव कर लेते है तो मुझे लगे काटों के घाव सोचने पर मजबूर कर देते हैं। मेरे घाव कहते हैं कि अरे तू तो रोती नहीं? कांटे भी चुभा दिए, तलवारें भी चला लीं, तोप-तमंचे सभी का तो उपयोग कर लिया फिर भी तू स्थिर है?...
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ajit gupta
समाजिक सरोकार
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[10 Apr 2010 00:53 AM]



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