हम इतने छुई-मुई से क्‍यों हैं? किसी ने कुछ कहा और हम भाग खड़े होते हैं?

Dr. Smt. ajit gupta जब लोगों को देखती हूँ कि गुलाब की पत्तियों से भी घाव कर लेते है तो मुझे लगे काटों के घाव सोचने पर मजबूर कर देते हैं। मेरे घाव कहते हैं कि अरे तू तो रोती नहीं? कांटे भी चुभा दिए, तलवारें भी चला लीं, तोप-तमंचे सभी का तो उपयोग कर लिया फिर भी तू स्थिर है?... [पूरी पोस्ट]
writer ajit gupta

समाजिक सरोकार

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[10 Apr 2010 00:53 AM]

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