ये वही पुरानी राहें हैं - डा. कुमार विश्वास (ye vahee puraanee raahe hain)
चेहरे पर चँचल लट उलझी, आँखों मे सपन सुहाने हैंये वही पुरानी राहें हैं, ये दिन भी वही पुराने हैंकुछ तुम भूली कुछ मै भूला मंज़िल फिर से आसान हुईहम मिले अचानक जैसे फिर पहली पहली पहचान हुईआँखों ने पुनः पढी आँखें, न शिकवे हैं न ताने हैंचेहरे पर चँचल लट उलझी,...
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हरि शर्मा
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[10 Apr 2010 00:35 AM]



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