रहीम दर्शन-सज्जन लोग समाज सेवा के लिए संपत्ति संचय करते हैं
तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहि सुजान।।कविवर रहीम कहते हैं कि जिसत तर पेड़ कभी स्वयं अपने फल नहीं खाते और तालाब कभी अपना पानी नहीं पीते उसी तरह सज्जनलोग दूसरे के हित के लिये संपत्ति का संचय करते हैं। तन रहीम है कर्म...
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दीपक भारतदीप
astha
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[10 Apr 2010 00:17 AM]



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