पाठक तू निर्णय कर इसका, न्याय पक्ष लेता है किसका ?

सुनिये मेरी भी.... ...मेरे संवेदनशील पाठक,आज लिखने की तो कुछ और ही सोची थी, परंतु कल रात राजतन्त्र: हमने खाया था एक हरिजन के घर में खाना (पोस्ट) पढ़ी, 'बखान' व असंवेदनशीलता अच्छी नहीं लगी अत: विरोधस्वरूप तुरंत अपनी टिप्पणी इस प्रकार दर्ज... [पूरी पोस्ट]
writer प्रवीण शाह
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[09 Apr 2010 23:41 PM]

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