जागरण की वेला का
जागरण की वेला का तू कौनसा सितारा है |मेरे मीठे सपनो का तू कौनसा इशारा है ||जिन्दगी की बाजी में किस्मतों का फेरा हैगूंजता रे दुश्मनों की जीत का नगारा हैकाल की नदी का तू कौनसा किनारा है ||फूलों का भरोसा दे काँटों ने ही पाला हैआज मेरी प्रीत का रे पतझड़ी...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[09 Apr 2010 23:00 PM]



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