'नहीं चाहिये मुझको पोती'....

योगेंद्र मौदगिल उन्नत कृषि विग्यान हो गया.भोंदू, वृद्ध किसान हो गया.लोकतंत्र के नरकतंत्र में,हर हाकिम, शैतान हो गया.भूख उगा करती खेतों में,रहन, फ़सल-खलिहान हो गया.ऊंची हर दूकान हो गयी,फीका हर पकवान हो गया.आपस में लड़-लड़ कर घायल,अपना हिन्दुस्तान हो गया.राम-राज है, जब से... [पूरी पोस्ट]
writer योगेन्द्र मौदगिल

ग़ज़ल

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[09 Apr 2010 21:54 PM]

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