'नहीं चाहिये मुझको पोती'....
उन्नत कृषि विग्यान हो गया.भोंदू, वृद्ध किसान हो गया.लोकतंत्र के नरकतंत्र में,हर हाकिम, शैतान हो गया.भूख उगा करती खेतों में,रहन, फ़सल-खलिहान हो गया.ऊंची हर दूकान हो गयी,फीका हर पकवान हो गया.आपस में लड़-लड़ कर घायल,अपना हिन्दुस्तान हो गया.राम-राज है, जब से...
[पूरी पोस्ट]
योगेन्द्र मौदगिल
ग़ज़ल
14
1
0
1
14
[09 Apr 2010 21:54 PM]



Shuffle








