सूनी किताब

RD Saxena: Spreading fragrance of Malwa तेरे फेस पर एक बुक पढता हूँ कभी ताज़गी तो कभी उदासी लिये हुए ..कभी संज़ीदगी तो कभी वीरानगी लिये हुए.. जाने कौन सी फितरत है तेरी कि ज़माने से मेल नही खाती यूँ ही भरती जाती है डायरियां खोखले हर्फों से.. - RDS 10.04.2010... [पूरी पोस्ट]
writer RDS

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[09 Apr 2010 20:24 PM]

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